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सच्चा_धर्म

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*सच्चा_धर्म 💕💕💕*

*अगर किसी के साथ ने अच्छा वक्त दिखाया है तो बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ देना ठीक नहीं।*

*एक शिकारी ने शिकार पर तीर चलाया। तीर पर सबसे खतरनाक जहर लगा हुआ था।*

*पर निशाना चूक गया। तीर हिरण की जगह एक फले-फूले पेड़ में जा लगा।*

*पेड़ में जहर फैला। वह सूखने लगा। उस पर रहने वाले सभी पक्षी एक-एक कर उसे छोड़ गए।*

*पेड़ के कोटर में एक धर्मात्मा तोता बहुत बरसों से रहा करता था। तोता पेड़ छोड़ कर नहीं गया, बल्कि अब तो वह ज्यादातर समय पेड़ पर ही रहता।*

*दाना-पानी न मिलने से तोता भी सूख कर कांटा हुआ जा रहा था।*

*बात देवराज इंद्र तक पहुंची। मरते वृक्ष के लिए अपने प्राण दे रहे तोते को देखने के लिए इंद्र स्वयं वहां आए।*

*धर्मात्मा तोते ने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया।*

*इंद्र ने कहा, देखो भाई इस पेड़ पर न पत्ते हैं, न फूल, न फल। अब इसके दोबारा हरे होने की कौन कहे, बचने की भी कोई उम्मीद नहीं है।*

*जंगल में कई ऐसे पेड़ हैं, जिनके बड़े-बड़े कोटर पत्तों से ढके हैं। पेड़ फल-फूल से भी लदे हैं।*

*वहां से सरोवर भी पास है। तुम इस पेड़ पर क्या कर रहे हो, वहां क्यों नहीं चले जाते ?*

*तोते ने जवाब दिया, देवराज, मैं इसी पर जन्मा, इसी पर बढ़ा, इसके मीठे फल खाए।*

*इसने मुझे दुश्मनों से कई बार बचाया। इसके साथ मैंने सुख भोगे हैं। आज इस पर बुरा वक्त आया तो मैं अपने सुख के लिए इसे त्याग दूं ?*

*जिसके साथ सुख भोगे, दुख भी उसके साथ भोगूंगा, मुझे इसमें आनंद है।*

*आप देवता होकर भी मुझे ऐसी बुरी सलाह क्यों दे रहे हैं ? यह कह कर तोते ने तो जैसे इंद्र की बोलती ही बंद कर दी।*

*तोते की दो-टूक सुन कर इंद्र प्रसन्न हुए,*

*बोल, मैं तुमसे प्रसन्न हूं, कोई वर मांग लो।*

*तोता बोला, मेरे इस प्यारे पेड़ को पहले की तरह ही हरा-भरा कर दीजिए।*

*देवराज ने पेड़ को न सिर्फ अमृत से सींच दिया, बल्कि उस पर अमृत बरसाया भी।*

*पेड़ में नई कोंपलें फूटीं। वह पहले की तरह हरा हो गया, उसमें खूब फल भी लग गए।*

*तोता उस पर बहुत दिनों तक रहा, मरने के बाद देवलोक को चला गया।*

*युधिष्ठिर को यह कथा सुना कर भीष्म बोले, अपने आश्रयदाता के दुख को जो अपना दुख समझता है, उसके कष्ट मिटाने स्वयं ईश्वर आते हैं।*

*बुरे वक्त में व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है। जो उस समय उसका साथ देता है, उसके लिए वह अपने प्राणों की बाजी लगा देता है।*

*किसी के सुख के साथी बनो न बनो, दुख के साथी जरूर बनो। यही धर्मनीति है और कूटनीति भी। 🍁🍀🌼🌺*

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