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एक कथा

*🙏एक प्रेरक कथा🙏*               एक ब्राह्मण यात्रा करते-करते किसी नगर से गुजरा बड़े-बड़े महल एवं अट्टालिकाओं को देखकर ब्राह्मण भिक्षा माँगने गया.         किन्तु किसी ने भी उसे दो मुट्ठी अऩ्न नहीं दिया. आखिर दोपहर हो गयी. ब्राह्मण दुःखी होकर, अपने भाग्य को कोसता हुआ जा रहा थाः “कैसा मेरा दुर्भाग्य है. इतने बड़े नगर में मुझे खाने के लिए दो मुट्ठी अन्न तक न मिला. रोटी बना कर खाने के लिए, दो मुट्ठी आटा तक न मिला ! इतने में एक सिद्ध संत की निगाह उस पर पड़ी. उन्होंने ब्राह्मण की बड़बड़ाहट सुन ली. वे बड़े पहुँचे हुए संत थे. उन्होंने कहाः “ब्राह्मण  तुम मनुष्य से भिक्षा माँगो, पशु क्या जानें भिक्षा देना ?” ब्राह्मण दंग रह गया और कहने लगाः “हे महात्मन्  आप क्या कह रहे हैं ? बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं में रहने वाले मनुष्यों से ही मैंने भिक्षा माँगी है”. संतः “नहीं ब्राह्मण. मनुष्य शरीर में दिखने वाले वे लोग भीतर से मनुष्य नहीं हैं.       अभी भी वे पिछले जन्म के हिसाब ही जी रहे हैं. कोई शेर की योनी से आया है, ...

* जीवन का आनन्द*

         *जीवन का आनन्द* . एक पुराना ग्रुप कॉलेज छोड़ने के बहुत दिनों बाद मिला। . वे सभी अच्छे केरियर के साथ खूब पैसे कमा रहे थे। . वे अपने सबसे फेवरेट प्रोफेसर के घर जाकर मिले। . प्रोफेसर साहब उनके काम के बारे में पूछने लगे। धीरे-धीरे बात लाइफ में बढ़ती स्ट्रेस और काम के प्रेशर पर आ गयी। . इस मुद्दे पर सभी एक मत थे कि, भले वे अब आर्थिक रूप से बहुत मजबूत हों पर.. . उनकी लाइफ में अब वो मजा नहीं रह गया जो पहले हुआ करता था। . प्रोफेसर साहब बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे, वे अचानक ही उठे और थोड़ी देर बाद किचन से लौटे और बोले, . डीयर स्टूडेंट्स, मैं आपके लिए गरमा-गरम कॉफ़ी बना कर आया हूँ, लेकिन प्लीज आप सब किचन में जाकर अपने-अपने लिए कप्स लेते आइये। . लड़के तेजी से अंदर गए, वहाँ कई तरह के कप रखे हुए थे, सभी अपने लिए अच्छा से अच्छा कप उठाने में लग गये, . किसी ने क्रिस्टल का शानदार कप उठाया तो किसी ने पोर्सिलेन का कप सेलेक्ट किया, तो किसी ने शीशे का कप उठाया। . सभी के हाथों में कॉफी आ गयी तो प्रोफ़ेसर साहब बोले, अगर आपने ध्यान दिया हो तो, जो कप द...

मुल्ला नसरुद्दीन

मुल्ला नसरुद्दीन का नाम किसने नहीं सुना है। बगदाद के रेगिस्तान में आठ सौ वर्ष पूर्व घूमने वाले मुल्ला परमज्ञानी थे। परंतु ज्ञान बांटने के उनके तरीके बड़े अनूठे थे। वे लेक्चर नहीं देते थे बल्कि हास्यास्पद हरकत करके समझाने की कोशिश करते थे। उनका मानना था कि हास्यास्पद तरीके से समझाई‌ गई बात हमेशा के लिए मनुष्य के जहन में उतर जाती है। बात भी मुल्ला नसरुद्दीन की सही है। और मनुष्यजाति के इतिहास में वे हैं भी इकलौते‌ परमज्ञानी, जो कि हास्य के साथ ज्ञान का मिश्रण करने में सफल रहे हैं। एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। प्रायः वे गधे पर और वो भी उल्टे बैठकर सवारी किया करते थे। और कहने की जरूरत नहीं है कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। खैर! उस दिन वे बाजार में उतरे और कुछ खजूर खरीदे। फिर बारी आई दुकानदार को मुद्राएं देने की। तो उन्होंने अपने पायजामे की जेब में टटोला, पर मुद्राएं वहां नहीं थी। फिर उन्होंने अपने जूते निकाले और जमीन पर बैठ गए। जूतों को चारों ओर से टटोलने लगे, परंतु मुद्राएं जूतों में भी नहीं थी। अब तक वहां काफी भीड़ एकत...

गुरु का आदेश

                                     *गुरु का आदेश*     एक शिष्य था समर्थ गुरु रामदास जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लगा। *समर्थ गुरु की जय ! भिक्षा देहिं....* *समर्थ गुरु की जय ! भिक्षा देहिं....*  एक घर के भीतर से जोर से दरवाजा खुला ओर एक  बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाला तान्त्रिक बाहर निकला और चिल्लाते हुए बोला - मेरे दरवाजे पर आकर किसी दूसरे का गुणगान करता है। कौन है ये समर्थ?? शिष्य ने गर्व से कहा-- *मेरे गुरु समर्थ रामदास जी... जो सर्व समर्थ है।*   तांत्रिक ने सुना तो क्रोध में आकर बोला कि इतना दुःसाहस कि मेरे दरवाजे पर आकर किसी और का गुणगान करे .. तो देखता हूँ कितना सामर्थ्य है तेरे गुरु में ! *मेरा श्राप है कि तू कल का उगता सूरज नही देख पाएगा अर्थात् तेरी मृत्यु हो जाएगी।*   शिष्य ने सुना तो देखता ही रह गया और आस-पास के भी गांव वाले कहने लगे कि इस तांत्रिक का दिया हुआ श्राप कभी भी व्यर्थ नही जाता.. बेचारा युवावस्था में ही...

सच्चा_धर्म

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *सच्चा_धर्म 💕💕💕* *अगर किसी के साथ ने अच्छा वक्त दिखाया है तो बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ देना ठीक नहीं।* *एक शिकारी ने शिकार पर तीर चलाया। तीर पर सबसे खतरनाक जहर लगा हुआ था।* *पर निशाना चूक गया। तीर हिरण की जगह एक फले-फूले पेड़ में जा लगा।* *पेड़ में जहर फैला। वह सूखने लगा। उस पर रहने वाले सभी पक्षी एक-एक कर उसे छोड़ गए।* *पेड़ के कोटर में एक धर्मात्मा तोता बहुत बरसों से रहा करता था। तोता पेड़ छोड़ कर नहीं गया, बल्कि अब तो वह ज्यादातर समय पेड़ पर ही रहता।* *दाना-पानी न मिलने से तोता भी सूख कर कांटा हुआ जा रहा था।* *बात देवराज इंद्र तक पहुंची। मरते वृक्ष के लिए अपने प्राण दे रहे तोते को देखने के लिए इंद्र स्वयं वहां आए।* *धर्मात्मा तोते ने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया।* *इंद्र ने कहा, देखो भाई इस पेड़ पर न पत्ते हैं, न फूल, न फल। अब इसके दोबारा हरे होने की कौन कहे, बचने की भी कोई उम्मीद नहीं है।* *जंगल में कई ऐसे पेड़ हैं, जिनके बड़े-बड़े कोटर पत्तों से ढके हैं। पेड़ फल-फूल से भी लदे हैं।* *वहां से सरोवर भी पास है। तुम इस पेड़ पर क्या कर ...

परमात्मा की लाठी

                         * परमात्मा की लाठी * बहुत सुंदर भाव अवश्य पढे....📖 एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था, कि उसने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबाला जा रहा था तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थीं।  साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया, शायद भूख का एहसास हो रहा था या मौसम का असर था। साधु हलवाई की भट्ठी को बड़े गौर से देखने लगा साधु कुछ खाना चाहता था लेकिन साधु की जेब ही नहीं थी तो पैसे भला कहां से होते, साधु कुछ पल भट्ठी से हाथ सेंकनें के बाद चला ही जाना चाहता था कि नेक दिल हलवाई से रहा न गया और एक प्याला गरम दूध और कुछ जलेबियां साधु को दे दीं। मलंग ने गरम जलेबियां गरम दूध के साथ खाई और फिर हाथों को ऊपर की ओर उठाकर हलवाई के लिए प्रार्थना की, फिर आगे चल दिया।  साधु बाबा का पेट भर चुका था दुनिया के दु:खों से बेपरवाह, वो फिर एक नए जोश से बारिश के गंदले पानी के छींटे उड़ाता चला जा रहा था। वह इस बात से बेखबर था कि एक युवा नव वि...

मनुष्य के भाग्य में क्या है।

                             *मनुष्य के भाग्य में क्या है ??*          एक बार महर्षि नारद वैकुंठ की यात्रा पर जा रहे थे, नारद जी को रास्ते में एक औरत मिली और बोली। मुनिवर आप प्रायः भगवान नारायण से मिलने जाते है। मेरे घर में कोई औलाद नहीं है आप  प्रभु से पूछना मेरे घर औलाद कब होगी?  नारद जी ने कहा ठीक है, पूछ लूंगा इतना कह कर नारदजी नारायण नारायण कहते हुए यात्रा पर चल पड़े । वैकुंठ पहुंच कर नारायण जी ने नारदजी से जब कुशलता पूछी तो नारदजी बोले जब मैं आ रहा था तो रास्ते में एक औरत जिसके घर कोई औलाद नहीं है। उसने मुझे आपसे पूछने को कहा कि उसके घर पर औलाद कब होगी?  नारायण बोले तुम उस औरत को जाकर बोल देना कि उसकी किस्मत में औलाद का सुख नहीं है।  नारदजी जब वापिस लौट रहे थे तो वह औरत बड़ी बेसब्री से नारद जी का इंतज़ार कर रही थी। औरत ने नारद जी से पूछा कि प्रभु नारायण ने क्या जवाब दिया ? इस पर नारदजी ने कहा प्रभु ने कहा है कि आपके घर कोई औलाद नहीं होगी। यह सुन ...

प्रारब्ध कर्म

🌫🌫🌫🌫   *प्रारब्ध*   🌫🌫🌫🌫     एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।      जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे ।     धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे     अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।     एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।     एक रात वह व्यक्ति उसका हा...

सफल जीवन

👦🏻एक बेटे ने पिता से पूछा- पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ??🤔 पिता, बेटे को पतंग 🔶 उड़ाने ले गए।  बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...🤔 थोड़ी देर बाद बेटा बोला- पापा.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की और नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!  ये और ऊपर चली जाएगी....🙂  पिता ने धागा तोड़ दिया .. पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई... तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया... बेटा.. 'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं.. हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं जैसे :             -घर-⛪          -परिवार-👨‍👨‍👧‍👦        -अनुशासन-🏃🏼       -माता-पिता-👪        -गुरू-और-👵🏻           -समाज- और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं... वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं.. ...

समस्या समस्या होती है चाहे हमारी हो या आपकी ।

एक *चूहा* एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर *कबूतर* को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है। कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है? निराश चूहा ये बात *मुर्गे* को बताने गया। मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है। हताश चूहे ने बाड़े में जा कर *बकरे* को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा। उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला *साँप* फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे *कबूतर* का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी *मुर्गे* को क...

हमारे विचार ही हमारे कर्म हैं।

एक राजा हाथी पर बैठकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था।अचानक वह एक दुकान के सामने रुका और अपने मंत्री से कहा- "मुझे नहीं पता क्यों, पर मैं इस दुकान के स्वामी को फाँसी देना चाहता हूँ।"  यह सुनकर मंत्री को बहुत दु:ख हुआ। लेकिन जब तक वह राजा से कोई कारण पूछता, तब तक राजा आगे बढ़ गया। अगले दिन, मंत्री उस दुकानदार से मिलने के लिए एक साधारण नागरिक के वेष में उसकी दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से ऐसे ही पूछ लिया कि उसका व्यापार कैसा चल रहा है? दुकानदार चंदन की लकड़ी बेचता था। उसने बहुत दुखी होकर बताया कि मुश्किल से ही उसे कोई ग्राहक मिलता है। लोग उसकी दुकान पर आते हैं, चंदन को सूँघते हैं और चले जाते हैं। वे चंदन कि गुणवत्ता की प्रशंसा भी करते हैं, पर ख़रीदते कुछ नहीं। अब उसकी आशा केवल इस बात पर टिकी है कि राजा जल्दी ही मर जाएगा। उसकी अन्त्येष्टि के लिए बड़ी मात्रा में चंदन की लकड़ी खरीदी जाएगी। वह आसपास अकेला चंदन की लकड़ी का दुकानदार था, इसलिए उसे पक्का विश्वास था कि राजा के मरने पर उसके दिन बदलेंगे।  अब मंत्री की समझ में आ गया कि राजा उसकी दुकान के सामने क्यों रुका था और क्यो...

नाम का फल

🙏*नानक नाम चड़दी कला तेरे भान्ड़े सरबत दा भला ।🙏 "नाम का फल" संसार का भ्रमण करते हुए गुरु नानक सच्चे पातशाह ओर मरदाना किसी जंगल से जा रहे थे! मरदाना ने कहा महाराज बहुत भूख लगी हैं! नानक जी नो कहा मरदाना रोटियां सेंक ले, मरदाना ने कहा बहुत ठंड हैं, ना तो कोई चुल्हा हैं और न ही कोई तवा हैं और पानी भी बहुत ठंडा हैं! तालाब छोटा था जैसे ही गुरु नानक जी ने तालाब को पानी को स्पर्श किया तो पानी उबाल मारने लगा! नानक देव जी ने कहा मरदाना अब रोटी सेंक ले! मरदाने ने आटे की चक्कियां बना कर उस तालाब में डालने लगें, रोटियां तो सिक्की नहीं आटे की चक्की डूब गई, दुसरी चक्की डाली वह भी डूब गई फिर एक ओर डाली वह भी डूब गई! मरदाना नो आकर नानक जी से कहा कि महाराज आप कहते हो रोटियां सेंक ले, रोटियां तो कोई सिक्की नहीं बल्कि सारी चक्कियां डूब गई! सच्चे पातशाह कहने लगे मरदाना नाम जप कर रोटियां सेंकी थी, मरदाना चरणों में गिर गया महाराज गलती हो गई! नानक देव जी कहने लगे मरदाना नाम जप कर रोटियां सेंक, मरदाना ने नाम जप कर पानी में चक्की डाली तो चमत्कार हो गया ...

सब्र करो

एक सेवक ने अपने गुरू को अरदास की, जी मैं सत्सँग भी सुनता हूँ, सेवा भी करता हूँ, मग़र फिर भी मुझे कोई फल नहीं मिला सतगुरु ने प्यार से पूछा, बेटा तुम्हे क्या चाहिए ? सेवक बोला मैं तो बहुत ही ग़रीब हूँ दाता 👏👏 सतगुरु ने हँस कर पूछा, बेटा तुम्हें कितने पैसों की ज़रूरत है ? सेवक ने अर्ज की, सच्चे पातशाह, बस इतना बख्श दो, कि सिर पर छत हो, समाज में पत हो 🙏 गुरु ने पूछा और ज़्यादा की भूख तो नहीं है बेटा ? सेवक हाथ जोड़ के बोला नहीं जी, बस इतना ही बहुत है । गुरु ने उसे चार मोमबत्तियां दीं और कहा मोमबत्ती जला के पूरब दिशा में जाओ, जहाँ ये बुझ जाये, वहाँ खुदाई करके खूब सारा धन निकाल लेना अगर कोई इच्छा बाकी हो तो दूसरी मोमबत्ती जला कर पश्चिम में जाना और चाहिए तो उत्तर दिशा में जाना, लेकिन सावधान, दक्षिण दिशा में कभी मत जाना, वर्ना बहुत भारी मुसीबत में फँस जाओगे । सेवक बहुत खुश हो कर चल पड़ा जहाँ मोमबत्ती बुझ गई, वहाँ खोदा, तो सोने का भरा हुआ घड़ा मिला बहुत खुश हुआ और सतगुरु का शुक्राना करने लगा थोड़ी देर बाद, सोचा, थोड़ा और धन माल मिल जाये, फिर आराम से घर जा कर ऐश करूँगा मोमबत्त...

आत्मा की तृप्ती

किसी राजा के पास एक बकरा था । एक बार उसने एलान किया की जो कोई इस बकरे को जंगल में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा। किंतु बकरे का पेट पूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्षा मैं खुद करूँगा। इस एलान को सुनकर एक मनुष्य राजा के पास आकर कहने लगा कि बकरा चराना कोई बड़ी बात नहीं है। वह बकरे को लेकर जंगल में गया और सारे दिन उसे घास चराता रहा,, शाम तक उसने बकरे को खूब घास खिलाई और फिर सोचा की सारे दिन इसने इतनी घास खाई है अब तो इसका पेट भर गया होगा तो अब इसको राजा के पास ले चलूँ,, बकरे के साथ वह राजा के पास गया,, राजा ने थोड़ी सी हरी घास बकरे के सामने रखी तो बकरा उसे खाने लगा। इस पर राजा ने उस मनुष्य से कहा की तूने उसे पेट भर खिलाया ही नहीं वर्ना वह घास क्यों खाने लगता। बहुत जनो ने बकरे का पेट भरने का प्रयत्न किया किंतु ज्यों ही दरबार में उसके सामने घास डाली जाती तो वह फिर से खाने लगता। एक विद्वान् ब्राह्मण ने सोचा इस एलान का कोई तो रहस्य है, तत्व है,, मैं युक्ति से काम लूँगा,, वह बकरे को चराने के लिए ले गया। जब भी बकरा घास खाने के लिए जाता तो वह उसे लकड़ी से मारता,, ...

Medical Warning

*मेडिकल चेतावनी* परिवार और दोस्तों के साथ कृपया साझा करें, यह बहुत महत्वपूर्ण है और किसी के जीवन को बचा सकता है। जापानी Doctors के एक समूह ने पुष्टि की है कि कुछ स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में गर्म पानी 100% प्रभावी है। जैसे कि :- 1 माइग्रेन 2 High BP 3 Low BP 4 जोड़ों के दर्द 5 दिल की धड़कन की अचानक तेज़ी और कमी 6 मिर्गी 7 Cholestrol का बढ़ता Level 8 खांसी 9 शारीरिक असुविधा 10 गोलु दर्द 11 अस्थमा 12 पुरानी खांसी 13 नसों के रुकावट 14 Uterus और Urine से संबंधित रोग 15 पेट समस्याओं 16 भूख की कमी 17 आँखें, कान और गले से संबंधित सभी बीमारियां भी 18 सिरदर्द Warm water का उपयोग कैसे करें ?? सुबह जल्दी उठें और Toilet से फारिग होने के बाद लगभग 4 गिलास गर्म पानी (लग भग 1 से सवा लीटर) पीयें। शुरू में 4 गिलास पीने में असुविधा हो सकती है लेकिन धीरे धीरे आप आदत बना लेंगे। नोट: गर्म पानी (बिल्कुल चाय की तरह से गर्म नहीं) लेने के बाद 45 मिनट के अंदर कुछ भी नहीं खाएं। गर्म जल उपचार उचित अवधि के भीतर स्वास्थ्य समस्याओं को हल करेगा जैसे : 🤙30 दिनों में diabetese पर प्...

हर काम की कद्र करो

पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा.... छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया... अब फाइनल इंटरव्यू कंपनी के डायरेक्टर को लेना था... और डायरेक्टर को ही तय करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं... डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae)  देखा और पाया  कि पढ़ाई के साथ- साथ यह  छात्र ईसी (extra curricular activities)  में भी हमेशा अव्वल रहा... डायरेक्टर- "क्या तुम्हें  पढ़ाई के दौरान कभी छात्रवृत्ति (scholarship)  मिली...?" छात्र- "जी नहीं..." डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज  की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.." छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।" डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी  क्या काम  करते  है?" छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..." यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..." छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे... डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी  कपड़े धोने में अपने  पिता...

What time should you sleep

*What Time Should You Sleep??* By Dr. Kiran Motwani Is there a best time to sleep? There is a saying that sleeping early and waking up early is good for your health. How true is that? Is it alright to sleep late and wake up late? You actually have an amazing biological clock ticking inside your body. It is very precise. It helps to regulate your various body functions including your sleeping time. From 11pm to 3am, most of your blood circulation concentrates in your liver. Your liver gets larger when filled with more blood. This is an important time when your body undergoes detoxification process. Your liver neutralizes and breaks down body toxins accumulated throughout the day. However if you don't sleep at this time, your liver cannot carry out this detoxification process smoothly. ·         If you sleep at 11pm, you have full 4 hours to detoxify your body. ·         If you sleep at 12am, you have 3 hours. ·    ...

What is Brainhemrej

          What is brainhemrej मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहचानें? मस्तिष्क आघात --जी वही, जिसे कईं बार ब्रेन-स्ट्रोक भी कह दिया जाता है अथवा आम भाषा में दिमाग की नस फटना या ब्रेन-हैमरेज भी कह देते हैं। इस के बारे में पोस्ट डाक्टर साहब लिखते हैं ---- एक पार्टी चल रही थी, एक मित्र को थोड़ी ठोकर सी लगी और वह गिरते गिरते संभल गई और अपने आस पास के लोगों को उस ने यह कह कर आश्वस्त किया कि सब कुछ ठीक है, बस नये बूट की वजह से एक ईंट से थोड़ी ठोकर लग गई थी। (आस पास के लोगों ने ऐम्बुलैंस बुलाने की पेशकश भी की). साथ में खड़े मित्रों ने उन्हें साफ़ होने में उन की मदद की और एक नई प्लेट भी आ गई। ऐसा लग रहा था कि इन्ग्रिड थोड़ा अपने आप में नहीं है लेकिन वह पूरी शाम पार्टी तो एकदम एन्जॉय करती रहीं। बाद में इन्ग्रिड के पति का लोगों को फोन आया कि कि उसे हस्पताल में ले जाया गया लेकिन वहां पर उस ने उसी शाम को दम तोड़ दिया। दरअसल उस पार्टी के दौरान इन्ग्रिड को ब्रेन-हैमरेज हुआ था --अगर वहां पर मौजूद लोगों में से कोई इस अवस्था की पहचान कर पाता तो आज इन्ग्रिड हमारे बीच ह...

एक घड़ी में पैदा होने के बाद सबके कर्म अलग-अलग क्यों

**एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके कर्म और भाग्य अलग अलग क्यों**    एक प्रेरक कथा ... एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया- **मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना, किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों ..?**  इसका क्या कारण है ? राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर हो गये .. अचानक एक वृद्ध खड़े हुये बोले - महाराज आपको यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है.. राजा ने घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार ( गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं.. राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा “तेरे प्रश्न का उत्तर आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं ,वे दे सकते हैं ।” राजा की जिज्ञासा और बढ़ गयी, पहाड़ी मार्ग पार कर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा.. राजा हक्का बक्का रह गया ,दृश्य ही कुछ ऐसा था, वे महात्मा अपना ही माँस चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे...

कैंसर बीमारी नहीं बिज़नेस है

                  ( कैंसर - बीमारी नहीं बिजनेस )- *☝🏼जानें चौंकाने वाला सच कैंसर के बारे में :- एक बार अवश्य पूरा पढे **⬇****  और पॉस्ट करे...                      भले ही आपको इस बात पर यकीन न हो रहा हो... लेकिन, यह पूरी जानकारी पढ़ने के बाद - आप भी यही कहेंगे कि - कैंसर कोई बीमारी नहीं... बल्कि, चिकित्सा जगत में पैसा कमाने का साधन मात्र है। पिछले कुछ सालों में - कैंसर को एक तेजी से बढ़ती बीमारी के रूप में प्रचारित किया गया। जिसके इलाज के लिए - कीमोथैरेपी, सर्जरी या और उपायों को अपनाया जाता है, जो महंगे होने के साथ-साथ... मरीज के लिए उतने ही खतरनाक भी होते हैं। लेकिन, अगर हम कहें कि - कैंसर जैसी कोई बीमारी है ही नहीं तो ? जी हां... यह बात बिल्कुल सच है कि - कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को स्वास्थ्य जगत में - कैंसर का नाम दिया गया है... और, इससे अच्छी खासी कमाई भी की जाती है। लेकिन, इस विषय पर लिखी गई एक किताब - 'वर्ल्ड विदाउट कैंसर' जो कि कै...

संत रैदाश जी

हमेशा की तरह सिमरन करते हुए अपने कार्य में तल्लीन रहने वाले भक्त रैदास जी आज भी अपने जूती गांठने के कार्य में तल्लीन थे! "अरे,,मेरी जूती थोड़ी टूट गई है,,इसे गाँठ दो,"--,राह गुजरते एक पंडित ने भगत रैदास जी से थोड़ा दूर खड़े हो कर कहा। "आप कहाँ जा रहे हैं श्रीमान? "भगत जी ने पंडित से पूछा। "मैं माँ गंगा स्नान करने जा रहा हूँ,,तुम क्या जानो गंगा जी के दर्शन और स्नान का महातम,,," "सत्य कहा श्रीमान,,आप भाग्यशाली हैं जो तीर्थ स्नान को जा रहे हैं,,"- -भगत जी ने कहा "सही कहा,,तीर्थ स्नान और दान का बहुत महातम है,,ये लो अपनी मेहनत की कीमत एक कोड़ी,, और मेरी जूती मेरी तरफ फेंको "पंडित बोला "आप मेरी तरफ कौड़ी को न फेंकिए,, ये कौड़ी आप गंगा माँ को गरीब रैदास की भेंट कह कर अर्पित कर देना"!! रैदासजी बोले पंडित अपने राह चला गया,,रैदास पुनः अपने कार्य में लग गए। अपने स्नान ध्यान के बाद जब पंडित गंगा दर्शन कर घर वापिस चलने लगा तो उसे ध्यान आया- - अरे उस रैदास की कौड़ी तो गंगा जी के अर्पण की नही,,नाहक उसका भार मेरे सिर पर रह जाता; ऐ...

मानव कर्म

🌫🌫🌫🌫   *प्रारब्ध*   🌫🌫🌫🌫     एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।      जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे ।     धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे     अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।     एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।     एक रात वह व्यक्ति उसका हा...

Women safety

1. एक नारी को तब क्या करना चाहिये जब वह देर रात में किसी उँची इमारत की लिफ़्ट में किसी अजनबी के साथ स्वयं को अकेला पाये ? Police का कहना है: जब आप लिफ़्ट में प्रवेश करें और आपको 13 वीं मंज़िल पर जाना हो, तो अपनी मंज़िल तक के सभी बटनों को दबा दें ! कोई भी व्यक्ति उस परिस्थिति में हमला नहीं कर सकता जब लिफ़्ट प्रत्येक मंजिल पर रुकती हो ! 2. जब आप घर में अकेली हों और कोई अजनबी आप पर हमला करे तो क्या करें ? तुरन्त रसोईघर की ओर दौड़ जायें Police का कहना है: आप स्वयं ही जानती हैं कि रसोई में पिसी मिर्च या हल्दी कहाँ पर उपलब्ध है ! और कहाँ पर चक्की व प्लेट रखे हैं !यह सभी आपकी सुरक्षा के औज़ार का कार्य कर सकते हैं ! और भी नहीं तो प्लेट व बर्तनों को ज़ोर- जोर से फैंके भले ही टूटे !और चिल्लाना शुरु कर दो !स्मरण रखें कि शोरगुल ऐसे व्यक्तियों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है ! वह अपने आप को पकड़ा जाना कभी भी पसंद नहीं करेगा ! 3. रात में ऑटो या टैक्सी से सफ़र करते समय ! Police का कहना है: ऑटो या टैक्सी में बैठते समय उसका नं० नोट करके अपने पारिवारिक सदस्यों या मित्र को मोबाईल पर उस भाषा में विव...

मानवता का अप्रतिम उदाहरण

मानवता का अप्रतिम उदाहरण। कल बाज़ार में फल खरीदने गया, तो देखा कि एक फल की रेहड़ी की छत से एक छोटा सा बोर्ड लटक रहा था, उस पर मोटे अक्षरों से लिखा हुआ था... "घर मे कोई नहीं है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और टॉयलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल लें, रेट साथ में लिखे हैं। पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें, धन्यवाद!!" अगर आपके पास पैसे नहीं हो तो मेरी तरफ से ले लेना, इजाज़त है..!! मैंने इधर उधर देखा, पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले दर्जन भर केले लिये, बैग में डाले, प्राइस लिस्ट से कीमत देखी, पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया, वहाँ सौ-पचास और दस-दस के नोट पड़े थे, मैंने भी पैसे उसमें रख कर उसे ढंक दिया। बैग उठाया और अपने फ्लैट पे आ गया, रात को खाना खाने के बाद मैं उधर से  निकला, तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी, दाढ़ी आधी काली आधी सफेद, मैले से कुर्ते पजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था, वो मुझे देखकर मुस्कुराया और बोला "साहब! फल तो खत्म हो गए।" उसका नाम पूछा तो बोला: "सीतार...

जिंदगी को वर्तमान में जियो

🐿एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती थी❗ गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थी❗ क्यों कि उसके मालिक, जंगल के राजा शेर ने उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था❗ गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी , कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगा❗ गिलहरी फिर काम पर लग जाती❗ गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते देखती थी, तो उसकी भी इच्छा होती थी कि मैं भी खेलूं , पर उसे अखरोट याद आ जाता, और वो फिर काम पर लग जाती❗ *ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था, शेर बहुत ईमानदार था❗* ऐसे ही समय बीतता रहा .... एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट दे कर आज़ाद कर दिया❗ *गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि अब अखरोट मेरे किस काम के❓* पूरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गये, इन्हें खाऊँगी कैसे❗ *यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है❗* इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है, पूरी ज़िन्दगी नौकरी, व्योपार, और धन कमाने में बिता देता है❗ *60 वर्ष की उम्र म...

जीवन मे उतार चढ़ाव

जबतक जीवन है सुख दुःख चलता रहेगा बात उन दिनों की है जब महात्मा बुद्ध, विश्व में भृमण करते हुए लोगों को ज्ञान बाँटा करते थे और बौद्ध धर्म का प्रचार किया करते थे। एक बार महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक वृक्ष नीचे ध्यान मुद्रा में बैठे थे। अचानक एक बूढी औरत वहाँ रोती – बिलखती हुई आई और गौतम बुद्ध के चरणों में गिर पड़ी। और बोली – महात्मा जी मैं दुनियाँ की सबसे दुखी औरत हूँ, मैं अपने जीवन से बहुत परेशान हूँ। महात्मा बुद्ध – क्या हुआ? आप क्यों दुःखी हैं? बूढी औरत- भगवन, मेरा एक ही पुत्र था जो मेरे बुढ़ापे का एकमात्र सहारा था। कल रात तीव्र बुखार से उसकी मृत्यु हो गयी, उसके बाद मेरे ऊपर जैसे दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मैं बहुत दुःखी हूँ, ईश्वर ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? अब मैं किसके सहारे जीऊँगी? महात्मा बुद्ध – हे माता! मैं आपके दुःख को समझ सकता हूँ। पहले आप मुझे किसी ऐसे घर से एक मुट्ठी चावल लाकर दें, जिस घर में कभी किसी की मृत्यु ना हुई हो। फिर मैं आपकी समस्या का हल बताऊँगा। औरत धीमे क़दमों से गाँव की ओर चल पड़ी। पूरे दिन वो इधर से उधर सभी लोगों के घर में भटकती रही लेकिन उसे क...

मन की हालत

                *मन की हालत* एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो  पंडित जी नहीं जा सके पर पंडित जी ने अपने दो शिष्यो को सेठ के यहाँ भोजन के लिए भेज दिया. पर जब दोनों शिष्य वापस लौटे तो उनमे एक शिष्य दुखी और दूसरा प्रसन्न था! पंडित जी को देखकर आश्चर्य हुआ और पूछा बेटा क्यो दुखी हो -- क्या सेठ नेभोजन मे अंतर कर दिया ? "नहीं गुरु जी" क्या सेठ ने आसन मे अंतर कर दिया ? "नहीं गुरु जी" क्या सेठ ने दच्छिना मे अंतर कर दिया ? "नहीं गुरु जी ,बराबर दच्छिना दी 2 रुपये मुझे और 2 रुपये दूसरे को" अब तो गुरु जी को और भी आश्चर्य हुआ और पूछा फिर क्या कारण है ? जो तुम दुखी हो ? तब दुखी चेला बोला गुरु जी मे तो सोचता था सेठ बहुत बड़ा आदमी है कम से कम 10 रुपये दच्छिना देगा पर उसने 2 रुपये दिये इसलिए मे दुखी हू !! अब दूसरे से पूछा तुम क्यो प्रसन्न हो ? तो दूसरा बोला गुरु जी मे जानता था सेठ बहुत कंजूस है आठ आने से ज्यादा दच्छिना नहीं देगा पर उसने 2 रुपए दे दिये तो मे प्रसन्न हू ...! बस यही हमारे मन...

गृह क्लेश क्यों होता है

             *_गृह क्लेश क्यों होता है*             *_प्रेरक कहानी_* *संत  कबीर  रोज  सत्संग  किया  करते  थे।  दूर-दूर  से  लोग  उनकी  बात  सुनने  आते  थे। एक  दिन सत्संग  खत्म  होने  पर  भी  एक आदमी  बैठा  ही  रहा। कबीर  ने  इसका  कारण  पूछा  तो  वह  बोला,  ‘मुझे आपसे  कुछ  पूछना  है।*  मैं  जानना  चाहता  हूं  कि  मेरे  यहां  गृह क्लेश  क्यों  होता  है  और  वह  कैसे  दूर  हो  सकता है ?* *कबीर  थोड़ी  देर  चुप  रहे, फिर  उन्होंने  अपनी  पत्नी से  कहा,‘ लालटेन  जलाकर  लाओ’ ।  कबीर  की  पत्नी लालटेन  जलाकर  ले  आई। वह  आदमी  भौंचक देखता  रहा।  सोचने  लगा  इत...

भगवान की सभांल

रात के एक बजा था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी, वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था। पर चैन नहीं पड़ रहा था । आखिर मैं थक कर नीचे उतर आया और कार निकाली  शहर की सड़कों पर निकल गया। रास्ते में एक मंदिर दिखा सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ। प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाये। वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा दर्श रही थी। सेठ ने पूछा " क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?" आदमी ने कहा " मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है " उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे  वह उस आदमी को दे दिए। अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थीं । सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो निसंकोच बताना। उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा "मेरे पास उसका पता है " इस पते की जरूरत नहीं है सेठजी आश्चर्य से...

मेरा वृन्दावन

*श्री राधे....*🌸💐           🌸 *||•|| मेरा वृन्दावन ||•||* 🌸         एक राजा ने भगवान  *श्रीकृष्ण* का एक मंदिर बनवाया, और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया। पुजारी बड़े भाव से *बिहारीजी* की सेवा करने लगे। भगवान की पूजा-अर्चना और सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई। राजा रोज एक फूलों की माला सेवक के हाथ से भेजा करता था। पुजारी वह माला *बिहारीजी* को पहना देते थे। जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला *बिहारीजी* के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे। यह रोज का नियम था।                                     एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका। उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ। पुजारी से कहना आज मैं नहीं आ पाउंगा। सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें। सेवक वापस आ गया। पुजारी ने माला *बिहारीजी* को पहना दी। फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने *बिहारीजी* की चढ़ी माला राजा को ही पहनाता रहा। कभ...

हमारे शब्द ही हमारे कर्म है।

                       *हमारे शब्द ही हमारे कर्म है।*                          *महाभारत के युद्ध के बाद*  18 दिन के युद्ध ने द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। उसकी आंखे मानो किसी खड्डे में धंस गई थी, उनके नीचे के काले घेरों ने उसके रक्ताभ कपोलों को भी अपनी सीमा में ले लिया था। श्याम वर्ण और अधिक काला हो गया था । युद्ध से पूर्व प्रतिशोध की ज्वाला ने जलाया था और युद्ध के उपरांत पश्चाताप की आग तपा रही थी । ना कुछ समझने की क्षमता बची थी ना सोचने की । कुरूक्षेत्र मेें चारों तरफ लाशों के ढेर थे । जिनके दाह संस्कार के लिए न लोग उपलब्ध थे न साधन । शहर में चारों तरफ विधवाओं का बाहुल्य था पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर केे महल मेंं निश्चेष्ट बैठी हुई शूूूून्य को ताक रही थी । तभी कृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं ! महारानी द्रौपदी की जय हो ...